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सावन बरसे तो बरसे नैन क्यू नीर रहे बारसाय।

22 जून 2021 आज का भजन  मथुरा से अक्रूर जी आकर कृष्ण को ले जाते हैं कृष्ण यह कह कर जाते हैं की वे दो दिन में लौट आएंगे, गोपियाँ इंतज़ार करती हैं ,सावन आने लगा है किनके संग झुला झूलेंगी वे क्या करें मोह की नांव एवं प्रीत की नांव पर सवार गोपियों की विरह वेदना: सावन बरसे तो बरसे नैन क्यों नीर रहे बरसाय। चम चम चमकत चपला अंबर, कब बरसेंगे हरि चित्त आय छम छम छमकत  सावन मयूर, कब मोर मन नाचैगो आय पिहू  पपीहा बोले चातक, मन  कब चहके स्वाति जल पाय कदली  कर कर्षण नभ गुंजित, गुम्फित गोविंद प्रीत बुलाय डोलत  अभागन  धर दो नांव,  प्रीत  सिंधु  कौन पार लगाय विरहन जलत पावस अगन मा, चले गए कान्ह कौन बुझाय कहे   इंदु  अश्रु  मोती  माल, भर  बिंदु  कब  पहनोगे  आय आ  जा  नटखट  नटवर  नागर,  काहे तू  दिल रह्यो  दुखाय सावन बरसे तो बरसे नैन क्यों नीर रहे बरसाय। आज का दोहा:  विरह अगन ऐसी जली, कान्हा कौन बुझाय शीघ्र चले आ साजना, तुम बिन रहा न जाय

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डॉ श्यामाप्रसाद

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दूर कर मैया अंतर्निहित भय मन का।