प्रभुजी मेरे अन्त: धीर धारावो।

19 जून 2021 

आज का भजन 


प्रभुजी मेरे अन्त : धीर धरावो।

तन को कष्ट भयंकर सह लू,हर चित विचलित न करावो।

यो जीवन सुख दुख को झूलों, ऊपर नीचे हिंडोल खावे।

कैद राजा तो कैद फकीर , क्षिण में प्रभु तू हमे बनावे।

बैठ्यों बैठ्यो गुमान में यो , जीवरों तो अकड्यो जाने।

बैठ पकड़ दियो काल झठको, ऐंठन सारी निकल आने।

सुख दुख निज के हिय बासे है,आ आ दुख जियो हिडकावे।

धूप छाव तो आनी जानी ; सुख अन्दर ही मौज मनावे।

इंदु खींच सुख ऊपर लावो, साँचो सुख साँचो फल पावों।

प्रभुजी मेरे अन्त : धीर धरावो।



आज का दोहा 

कभी रात तो दिन कभी 

पास कभी तो फेल 

जीवन गति यूं ही रहे, 

धूप  छांव का खेल



सुरेश चौधरी इंदु 

कोलकाता

9830010986

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