जिनके प्रबल भुजदंड प्रचंड कोदंड निरन्तर उठाये।
आज का भजन ( प्रभु राम शरण)
जिनके प्रबल भुजदंड प्रचंड कोदंड निरन्तर उठाये
भानु कुल कमल सूर्य विमल कोटि कंदर्प देख शर्माए
अरुण राजीव दल नयन सुषमाकर अयन तन भरमाये
वक्ष विशाल उन्नत भाल अजान बाहु नयन बसाये
विश्वमूर्ति कर पूर्ति लीलाधर अद्भुत लीला रचाये
गौतम नार अहिल्या तार जगस्वामी रूप बतलाये
राम विलख विलख सहचरी ढूंढते पुरषोत्तम कहाये
'इंदु' श्रुति शारद नारद शंभु ऋषि मुनि सब प्रभु मनाए
आज का दोहा:
तप्त स्वर्ण सी देह है, शास्त्र निपुण प्रभु विज्ञ
श्याम कांति शतदल नयन, चरण शरण अनभिज्ञ

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