यह मेरा प्रेमनगर मस्ती भरी मधुशाला
आज का भजन गीत
(यह भक्तिगीत 2014के लिखा था, आज भी यह मेरे सबसे प्रिय भजनों में से एक है, आप भी अपनी राय दीजिये)
यह मेरा प्रेमनगर मस्ती भरी एक मधुशाला
जहाँ एक ही रंग, एक ही ढंग, एक ही प्याला
एक धर्म, एक जाति, एक लोग, एक ही निवाला
एक ताल, एक स्वर, एक लय में गाता मतवाला
राम नाम की है सूरा, राम नाम की ही हाला
सत्संग हुआ यह प्याला, टकरा झंकृत कर डाला
शब्द प्रीत के कहता डाल डाल वैजन्ती माला
झूम झूम संकीर्तन करता, इस को पीने वाला
इस नगर की रीत निराली, सब है गड़बड़झाला
मन के भीतर बिंदु, बिंदु भीतर सिन्धु समा डाला
कहता इंदु प्रेम से जो बसता, रहता मतवाला
लोभ क्रोध की गठरी छोड़ जीवन बनेगा आला
आज का दोहा:
झूम झूम जप ले जरा, अपने प्रभु का नाम
शब्द प्रीत के जो कहे, बन जाएंगे काम
सुरेश चौधरी 'इंदु'
कोलकाता
9830010986

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