2019 का लेखाजोखा
सन 2019 का लेखाजोखा।।।।।।
आस नहीं निराश नही, जीने का कोई प्रयास नहीं
मन मेरा उदास नहीं, बात थी अब कोई खास नहीं
वेदना का उद्गम कयास नहीं
जाते जाते छोड़ी नही हया
पर सच है वर्ष एक बीत गया ।
कुटिल नियति का रोष था, पल प्रतिपल देह आक्रांत रहा
अवचेतन सी मन व्यथा, अंतस वेदन से अशांत रहा
क्षण क्षण क्षरित सम्प्रेषण, संवेदना युगात्मक जनप्रथा
आत्मसात हो स्वध्याय, शेष-अशेष रचना हरी कथा
क्या कहूँ कैसे कहूँ आत्म व्यथा
चित्त-पोषण संग देह सित गया
पर सच है वर्ष एक बीत गया
कहीं विषाद कहीं हर्ष, साथ संभावनाओं का वर्ष
लिया निर्णय कर संघर्ष, आकांक्षा पूर्ती का उत्कर्ष
प्रगति मार्ग बना संघर्ष सहर्ष
हर्ष विषाद में जीवन रीत गया
पर सच है वर्ष एक बीत गया
शुरू शुरू रहा हल्ला, आएगा सोनिया का लल्ला
गया झाड़ झाड़ पल्ला ,आशा थी पर निकला निठल्ला
बाप दादा की कमाइ, चुनाव में अमेठी भी खो दी
उधर होएडी मोदी, इधर भई ये मीडिया गोदी
देख देख हरकत जनता रो दी
कौन हारा क्यों मौन जीत गया
पर सच है वर्ष एक बीत गया।
हिंदुत्व ऊंची शान, व्योम छाया केशरिया वितान
मन्दिर बनेगा महान, राम जी अब देश की पहचान
राम जी का राज्य आएगा जान
आज मन में बैठ मनमीत गया
पर सच है वर्ष एक बीत गया
रो रो कर इतने साल, हमने सुने कश्मीर तराने
तीन सौ सत्तर पक्का, हटे ना ये हैं कोढ़ पुराने
बात इस पार की नही, बात उस पार की होने लगी
कर्दम वाली मौन सी, नील घाटी सिसक रोने लगी
आतंकी की जात खोने लगी
बुलन्दी से गा रहे गीत नया
पर सच है वर्ष एक बीत गया
ओम डमरू बजा रहा, देश को करतल ध्वनि नचा रहा
मार्ग हैं रक्त रंजीत, गलियारे भयभीत सजा रहा
पगडंडियों के शूल हटा रहा
शिखर चढ़ डमरु सिखाये हित नया
पर सच है वर्ष एक बीत गया
कुछ हारे कुछ चकारे, कुछ इधर फिरते मारे मारे
खलनायक बहलाते देश को तोड़ फोड़ के सहारे
बुझी आग कश्मीर की, भारत देश पूरा जला दिया
हुई राजनीती विफल, रक्त से अगन से नहला दिया
नादान देश को बरगला दिया
प्रीत नवनीत ले वो जीत गया
पर सच है वर्ष एक बीत गया
हर बरस क्यों होता है, इस बरस भी है महंगा प्याज
इस बरस भी रुला रुला, महंगाई को न आयी लाज
अर्थ अनर्थ तदर्थ न हुआ आज
चूक गया विपक्ष कर चित गया
पर सच है वर्ष एक बीत गया
प्रेरणा का उद्भव उच्च कल्पनाओं का उत्कर्ष
जीवन स्थापित्य प्रबोधन, महापुरुषों का आदर्श
मंगल गान कालगति के समर का भीषण संघर्ष
विजित दृष्टा उद्बोधक सृष्टा नव चित्रमय हर्ष
स्वागत होगा नवल वर्ष का यह हर मन जीतेगा
स्वर्णिम हर्षमय विश्व गुरु बनाता वर्ष बीतेगा
हम आप तब एक वर्ष बीत गया नहीं गाएंगे
चंदन दीप जलाएंगे मंगल गीत सुनाएंगे

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