एक भजन निर्गुण
इस पार संसार माया का, उस पार तारणहार
बीच भँवर फंसी है नैया, कैसे जाऊं उस पार
सुत, दारा, बांधव खींचे है, कर मोह से उद्धार
प्रभु नारायण पार करा दे, मैं जपूँ बारम्बार ।
इस पार..
करम कियो ना कोई ऐसो, जो होय कृपा तिहार
तुम्हे पतित पावन है कहते, ओ नाथ कृष्ण मुरार
आकर शरण लो मुझे भी तुम, अब तो बिरज सरकार
जीवन तो है आना जाना, हमारे प्राणाधार |
इस पार..
कृपानिधान तुम्ही अतल विरल, मैं करूं पापाचार
अर्चन के भेद कई पर तू, तू अहैतुक अविकार
लिए सहज सुन्दर छवि मनबस, श्री विष्णु के अवतार
वारि,क्षितिज,अनल,अनिल,मृत्तिका, बने हैं ये नवद्वार ।
इस पार..

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