अयोध्या बलिदान दिवस

2 नवम्बर ,राम-शरद बलिदान दिवस

रामलला हम आएंगे , मंदिर वंही बनाएंगे :-
(आलेख सुधांशु टांक की वाल से लिए गए तथ्य पर आधारित)

तारीख थी 22 अक्टूबर 1990 । दो भाई शरद और रामकुमार कोठारी कोलकाता (तब कलकत्ता) से चले थे. बनारस आकर रुक गए थे. सरकार ने ट्रेनें और बसें बंद कर रखी थीं. तो वे टैक्सी से आजमगढ़ के फूलपुर कस्बे तक आए. इसके बाद यहां से सड़क का रास्ता भी बंद था. लेकिन दोनों 25 अक्टूबर को अयोध्या की तरफ पैदल निकले पड़े. करीब 200 किलोमीटर पैदल चलने के बाद 30 अक्टूबर को दोनों अयोध्या पहुंचे. 

इधर 30 अक्टूबर 1990 तक अयोध्या में लाखों की संख्या में कारसेवक जुट चुके थे. सब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जन्मस्थल की ओर जाने की तैयारी में थे। जन्मस्थल के चारों तरफ भारी सुरक्षा थी. अयोध्या में लगे कर्फ्यू के बीच सुबह करीब 10 बजे चारों दिशाओं से विवादित बाबरी मस्जिद की ओर कारसेवक बढ़ने लगे. इनका नेतृत्व कर रहे थे अशोक सिंघल, उमा भारती, विनय कटियार जैसे नेता. विवादित स्थल के चारों तरफ और अयोध्या शहर में यूपी पीएसी के करीब 30 हजार जवान तैनात किए गए थे. 

समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव उस वक्त यूपी के मुख्यमंत्री थे. उनका साफ निर्देश था कि विवादित मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. पुलिस को पहले स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि लोगों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने से लेकर गोली चलाने तक जो उपाय हो , वो सब किये जाएं।

तो 30 अक्टूबर की सुबह साधु-संतों और कारसेवकों ने 11 बजे सुरक्षाबलों की उस बस को काबू कर लिया जिसमें पुलिस ने कारसेवकों को हिरासत में लेकर शहर के बाहर छोड़ने के लिए खड़ा किया गया था। इसी बीच, एक साधु ने बस ड्राइवर को धक्का देकर न
हटा दिया ।  इसके बाद वो खुद ही बस की स्टीयरिंग पर बैठ गया. बैरिकेडिंग तोड़ते हुए बस रामलला के जन्मस्थान और विवादित मस्जिद की ओर तेजी से बढ़ी. बैरिकेडिंग टूटने से रास्ता खुला तो 5000 हजार से ज्यादा कारसेवक विवादित स्थल तक पहुंच गए.

पुलिस लगातार आंसू गैस छोड़ रही थी । लाठी चार्ज कर रही थी । इधर बैरिकेडिंग टूटने के बाद कारसेवक विवादित ढांचे के गुंबद पर चढ़ गए गुंबद पर चढ़ने वाला पहला आदमी शरद कोठारी ही थे. फिर उनका भाई रामकुमार भी चढ़ा. दोनों ने वहां भगवा झंडा फहरा दिया। यह एक ऐतिहासिक पल था। मुलायम सिंह यादव का घमंड चकनाचूर हो चुका था

झंडा फहराते ही पुलिस ने कारसेवकों पर फायरिंग शुरू कर दी सरकारी आंकड़ों के अनुसार 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में हुई फायरिंग में 5 कारसेवकों की जान चली गई थी। गैर सरकारी आंकड़े सैकड़ों की संख्या बतलाते हैं।

किताब 'अयोध्या के चश्मदीद' के अनुसार 30 अक्टूबर को गुंबद पर झंडा लहराने के बाद शरद और रामकुमार 2 नवंबर  शायद उस दिन देव दीवाली थी, को विनय कटियार के नेतृत्व में दिगंबर अखाड़े की तरफ से हनुमानगढ़ी की तरफ जा रहे थे। कहते हैं पुलिस ने दोनों को पकड़कर उनको ज़बरदस्ती गोली मार दी । कुछ लोगों के अनुसार जिस्जगह वे भी ठहरते उस जगह आधी रात पुलिस उन्हें ढूंढती आयी और घर से बाहर निकाल गोली मार दी।
पूरे 29 साल हो गए।इसी दिन बाबरी मस्जिद के गुंबद पर शरद (20 साल) और रामकुमार कोठारी (23 साल) नाम के भाइयों ने भगवा झंडा फहराया.

4 नवंबर 1990 को शरद और रामकुमार कोठारी का सरयू के घाट पर अंतिम संस्कार किया गया. उनके अंतिम संस्कार में हजारों लोग उमड़ पड़े थे. दोनों भाइयों के लिए अमर रहे के नारे गूंज रहे थे. शरद और रामकुमार का परिवार पीढ़ियों से कोलकाता में रह रहा है. मूलतः वे राजस्थान के बीकानेर जिले के रहने वाले थे.

यह एक दुःखद खुलासा था कि दोनों भाइयों के अंतिम संस्कार के करीब एक महीने बाद ही 12 दिसंबर को इनकी बहन की शादी होने वाली थी.

कोठारी बंधुओ का बलिदान व्यर्थ नही जाएगा। शीघ्र ही भव्य मंदिर का निर्माण अयोध्या में जन्मस्थल पर होगा। 
इस दीवाली अयोध्या की भव्यता देख एक आशा संचारित हुई है, शायद इस देव दीवाली के पूर्व शुभ समाचार मिल जाए। तब यह कविता स्वतः सर्जित हुई:

कोदंड  की  टंकार सुनाने, केशरिया   दल  निकला था
शोणित सनातनी राघव का, कलंक  मिटाने मचला था
देव दीवाली दीप दहका, अरि  छल  लहका लहका था
राम सेवा में राम  महका,  हेमन्त  मे  शरद  बहका  था

राम  ध्वज  राम  भवन  फहरा, उसे कहाँ यह भानी थी
ढूंढ  ढूंढ  मारा कातिल  ने,  काल  रात्रि  बलिदानी  थी 
पूर्ण  उनतीस  वर्षों  का  तप , अब  प्रत्यंचा  चढ़ानी  है
स्मारक  राम  शरद का  होगा, पुष्प  श्रेष्ठ  अभिमानी है

दीपमालिका  यहाँ  असितता, को   सित करने आयी है
वैभव  खोज   पुरातन  देखो,  राम  राज्य   अगुआई  है
हुई प्रतीक्षा विकल विकट अब, भव्य  सदन की बारी है
राम नाम अभिराम जपो तुम, कृपालु  अवध  बिहारी है

अंध जडित इस अमा निशा में, ज्योति  पुंज वो लाया है
सघन गगन पर घन   सा छाया, नवल  उल्लास आया है
आलोकित  है अवनी   अम्बर,  रवि  रजनी  में  छाया है
दीपमालिका   दीप   वर्तिका,  द्युति  द्युलोक  प्रच्छाया है  

नगर  नगर ग्राम  ग्राम खुशियाँ, दीप  लौ झिलमिलाती है
कौशलाधीश  कौशल  आये,  अयोध्या  अब   बुलाती है
भव्य  भवन  भुवनेश्वर  भाषित,  भारत  भावित भरमाते
शत   कोटि   आस्थाएं   पुकारे,  सौगंध   राम  की  खाते

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