गुरुपर्व पर अभिनंदन
550 वे प्रकाश पर्व पर अभिनंदन
गुरु नानक देव जी के बारे में एक कहावत प्रचलित है:
भैण नानकी दा वीर, तन-मन दा फकीर
ओ है जोगियां दा जोगी, ते हैं पीरां दा पीर |
या कुछ ऐसे कहूँ,
बाबा नानकशाह फकीर, हिन्दू का गुरु- मुसलमान का पीर |
यह पीर फकीर संत बाल्यावस्था से ही अति कुशाग्र और समस्त अध्यात्म का प्रणेता था, यवनों के क्रूर आक्रमणों से आहत बालक कुछ बड़ा करने की सोच रख भविष्य निर्माता बनने जा रहा था , जरा सोचिये; सात वर्ष का बालक जब यह कहता है- मैं सारी विद्याएँ और वेद-शास्त्र जानता हूँ और मुझे तो सांसारिक पढ़ाई की अपेक्षा परमात्मा की पढ़ाई अधिक आनन्दायिनी प्रतीत होती है, यह कहकर निम्नलिखित वाणी का उच्चारण करता है- मोह को जलाकर (उसे) घिसकर स्याही बनाओ, बुद्धि को ही श्रेष्ठ काग़ज़ बनाओ, प्रेम की क़लम बनाओ और चित्त को लेखक। गुरु से पूछ कर विचारपूर्वक लिखो (कि उस परमात्मा का) न तो अन्त है और न सीमा है। निश्चय ही वह बालक साधारण नहीं हो सकता वह बालक ईश्वर तुल्य नानकशाह ही हो सकता है।
नानकदेव जी के चरणों मे भाव समर्पण
सुरेश चौधरी

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