अयोध्या के दीपक

यह चित्र महात्मा गांधी के चित्र से भी ज्यादा वायरल हो रहा है इसमें ऐसा क्या है जिसके कारण इसे वायरल किया जा रहा है,केवल यह दिखाने के लिए की चित्रकार कितना कमीना है जिसे देश की गरीबी की फ़ोटो खींच स्लम डॉग मिलिनेयर  बनना चाहता है। क्या यह हकीकत किसी से छुपी है भारत मे आज भी 20 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं। क्या हम आये दिन  कचरे के ढेर से प्लास्टिक ,कागज बीनते लोगो को नही देखते फिर उन चित्रों को क्यों नही वायरल करते । केवल यह अयोध्या के दीपक हैं इस लिए एक मानसिकता वाले हिन्दू पूजा को बदनाम करने और यह सिद्ध करने के लिए की राम के नाम पर कितना पैसा बर्बाद किया यह चित्र वायरल कर रहे हैं। क्यों वे यह घृणित काम कर रहे हैं और हम बुद्धिजीवी इसे बढ़ावा क्यों दे रहे हैं , जरा सी बुद्धि का प्रयोग कीजिये और हकीक़त स्वीकारिये। हो सकता है कोई इस बच्ची को लाकर फोटोशूट किया हो, क्या बचे तेल को जमा करना गरीबी या धन की बर्बादी का द्योतक है। फिर तो मायावती के जन्म दिन पर होने वाले अरबो के खर्च और सैफई मेला में नर्तिकयों के डांस को क्या कहेंगे। तब यह कहना चाहिए हमारे देश मे गरीबी है ही नहीं। जो राम का नहीं वो किसी काम का नहीं।

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